Tuesday, September 4, 2012


"अगर स्वराज का मक़सद हमें सभ्य बनाना नहीं है, हमारी सभ्यता को स्थिर एवम् शुद्ध करना नही है तो इसका (स्वराज) कोई मूल्य नहीं होगा | हमारी सभ्यता का मूल सार अपने सभी कार्यों, चाहे वे जनता के लिए हों या व्यक्तिगत, में नैतिकता को उच्च स्थान प्रदान करना है |" -यंग इंडिया, 23-1-‘30
"पूर्ण स्वराज....पूर्ण... कम्पलीट से है क्योंकि जैसा जितना ये (स्वराज) एक राजकुमार के लिए है उतना ही एक खेतिहर के लिए है, जैसा जितना ये एक अमीर ज़मींदार के लिए है उतना ही एक भूमिहीन किसान के लिए है, जैसा जितना ये हिंदुओं के लिए है उतना ही मुसलमानों केलिए है, ईसाईयों, पारसियों, जैनियों, सिक्खों एवम् यहूदियों के लिए है जाती या नस्ल या जीवन स्तर का विभेद विचारणीय नही है |" -यंग इंडिया, 5-3-‘31 
(The original text is in English, it is translated in Hindi by Priyadarshan Shastri)

Monday, September 3, 2012

"मेरे- या-- हमारे सपनों के स्वराज में किसी भी धार्मिक अथवा जातीय गंतव्य (मंजिल) की पहचान नहीं होगी न ही ऐसा होगा जिसमें पढ़े लिखे और अमीर आदमियों का ही एकाधिकार हो । स्वराज सबके लिए होगा जिसमें किसान होगे, इसके अलावा खासकर अपाहिज, अँधे एवं कठिन परिश्रम करने के बावजूद भुखमरी के शिकार लाखों लोग भी सम्मिलित होंगे ।": Young India, 26-3-‘31
"ये कहा जाता है कि इंडियन स्वराज में सबसे बड़े समुदाय का शासन होगा यानि हिन्दूओं का । इससे (ऐसा कहने की ) बड़ी भूल कोई नहीं हो सकती। अगर ऐसा सत्य होता तो मैं इसे स्वराज कहने से मना कर देता तथा अपने वश में की, पूरी ताकत से लड़ता । मेरे लिए हिंद स्वराज सब लोगों का शासन है, न्याय का शासन है ।" Young India, 16-4-‘31

Sunday, September 2, 2012


"स्वराज केवल वहाँ कायम रखा जा सकता है जहाँ निष्ठावान एवम् देशभक्त, जिनका देश के भले का लक्ष्य ही सर्वोपरि हो चाहे कोई भी बात हो जिसमें व्यक्तिगत लाभ ही क्यों ना शामिल हो | स्वराज से अभिप्राय अधिकतम (लोगों) के शासन से है | जहाँ अधिकतम ही अनैतिक एवम् स्वार्थी हो जाएँ वहाँ उनके शासन को 'अराजकता' के सिवा कुछ भी नहीं कहा जा सकता है |"- .Young India, 28-7-‘21

'स्वराज' एक पवित्र शब्द है, एक वैदिक शब्द है, जिसका अर्थ है- आत्मानुशासन तथा आत्मसंयम,  सभी प्रतिबंधनों से मुक्ति को अक्सर 'आज़ादी' समझा जाता है से नहीं है |' -महात्मा गाँधी 
महात्मा गाँधी ने १९२२ में माँग की थी - "स्वराज ब्रिटिश पार्लियामेंट की भिक्षा नहीं होगी, यह भारत की स्वयं की गई घोषणा होगी | यह सत्य है कि इसे पार्लियामेंट का एक्ट के अधीन अभिव्यक्त किया जाएगा किंतु यह भारत के लोगों की घोषणा का विनम्र अनुमोदन मात्र होगा जैसा कि दक्षिण अफ्रीका के संघ के मामले में किया गया था | "उक्त माँग महात्मा गाँधी ने भारत के संविधान की रचना भारत के लोगों के द्वारा स्वयं करने के संबंध में ब्रिटिश शासन से की थी |"
-प्रियदर्शन शास्त्री 

'पूर्ण स्वराज'

"महात्मा गाँधी हमारे राष्ट्रपिता हैं और हर पिता का एक सपना होता है अपने घर को लेकर के । गाँधी जी ने अपने घर- भारत की आजादी का सपना देखा था। अपने इसी सपने को उन्होंने  'स्वराज' नाम दिया था । गाँधी जी की दृष्टि में आजादी का मतलब भारत में ब्रिटिश शासन के अंत मात्र से नहीं था, उनकी निगाह में 'पूर्ण स्वराज' प्राप्त करना असल आजादी था । आज के सन्दर्भ में देश जिन आर्थिक, सामाजिक एवं राजनैतिक परिस्थितियों से गुजर रहा है उससे स्पष्ट प्रतीत होता है कि अभी हमारे देश से केवल ब्रिटिश शासन का अंत हुआ है । महात्मा गाँधी का 'स्वराज' अभी आना शेष है।"
- प्रियदर्शन शास्त्री